सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही!

रविवार, जून 13, 2010

सांसों की जरुरत है जैसे




1 टिप्पणी:

  1. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

    उत्तर देंहटाएं