सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही!

सोमवार, जून 14, 2010

छूकर मेरे मन को....








10 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर गीत सुनवाया, आभार.

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  2. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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  3. आपका सुन्दर गीत पढकर हमको बी अच्चा लगा ।
    आभार!

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  4. बहुत दिनों बाद सुना यह गीत।

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