सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज संघर्ष ही!

बुधवार, अगस्त 05, 2009

सुहाना मौसम

झमाझम बारिस हो रही है.....


मौसम सुहाना है...


आगे लिखने के लिए शब्द नहीं मिल रहें.....

6 टिप्‍पणियां:

  1. बस!! काफी तो लिख डाला.

    रक्षा बंधन के पावन पर्व की शुभकामनाऐं.

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  2. चलो यही ठीक है......इतना इशारा काफी है.....;)

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  3. चलो कंही तो झमाझम बारीश हो रही है।मज़ा आ गया।

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  4. मिलेंगे, ज़रूर मिलेगे. ज़रा रूमानी महसूस कीजिए
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    'विज्ञान' पर पढ़िए: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!

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